सरकारी विभागों में बढ़ती वित्तीय अनियमितताओं पर एसोसिएशन की चेतावनी
- By Gaurav --
- Tuesday, 10 Mar, 2026
Association warns against rising financial irregularities in government departments
Second Innings Association ने सरकारी विभागों में बढ़ती बैंकिंग धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ियों और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आ रहे मामलों को अब अलग-थलग घटनाएं मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, बल्कि यह प्रशासनिक और वित्तीय शासन व्यवस्था में गहरी प्रणालीगत कमजोरियों की ओर इशारा करते हैं।
एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि कई विभागों में अत्यंत संवेदनशील और बड़े वित्तीय विवेकाधिकार से जुड़े कार्य अस्थायी, आउटसोर्स या संविदा कर्मियों को सौंपे जा रहे हैं। ये कर्मी नियमित सरकारी कर्मचारियों पर लागू कठोर अनुशासनात्मक नियमों और जवाबदेही प्रणाली के अंतर्गत नहीं आते, फिर भी कई मामलों में उन्हें वित्तीय निर्णयों और लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। इससे वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
प्रेस नोट के अनुसार वित्त और लेखा अधिकारियों—जैसे अकाउंट्स ऑफिसर, एसीएफए और डीसीएफए—की भूमिका वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं के पालन को सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कई मामलों में इन अधिकारियों की अपेक्षित कठोर जांच कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। चूंकि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वित्तीय मामलों में इनकी सलाह और सिफारिशों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए जब निगरानी कमजोर होती है तो पूरे वित्तीय अनुशासन पर असर पड़ता है।
एसोसिएशन ने यह भी चिंता जताई कि वित्तीय दृष्टि से संवेदनशील पदों पर अधिकारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहते हैं, जिससे हितों का टकराव और आपसी नेटवर्क बनने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे पदों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए नियमित रोटेशनल ट्रांसफर अनिवार्य किए जाने चाहिए।
इसके अलावा सरकारी विभागों के अधीन संचालित विभिन्न सोसायटियों के संचालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रेस नोट में कहा गया है कि कई बार वित्तीय वर्ष के अंत में विभाग अपनी अव्ययित या अधिशेष राशि इन सोसायटियों को स्थानांतरित कर देते हैं ताकि बजट राशि लैप्स न हो। चूंकि इन सोसायटियों के वित्तीय लेन-देन कई बार सख्त सरकारी ऑडिट व्यवस्था के सीधे दायरे में नहीं आते, इसलिए यह व्यवस्था वित्तीय नियमों और निगरानी तंत्र को दरकिनार करने का माध्यम बन सकती है।
Second Innings Association ने चेतावनी दी कि यदि इन प्रवृत्तियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे सरकारी प्रशासन की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और वित्तीय ईमानदारी पर गंभीर असर पड़ेगा।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
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सभी विभागों में समीक्षा कर यह पता लगाया जाए कि कहां संविदा या गैर-सरकारी कर्मियों को अनुचित वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।
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वित्त और लेखा अधिकारियों की जवाबदेही व्यवस्था को स्पष्ट और मजबूत किया जाए।
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वित्तीय रूप से संवेदनशील पदों पर कार्यरत अधिकारियों के नियमित रोटेशनल ट्रांसफर लागू किए जाएं।
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सरकारी विभागों के अधीन संचालित सोसायटियों को भी सख्त ऑडिट और निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाया जाए।
एसोसिएशन ने कहा कि सार्वजनिक धन जनता द्वारा सरकार को सौंपा गया एक पवित्र विश्वास है और इसके प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई, अपारदर्शिता या अनियमितता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। साथ ही सरकार से वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।